मृत सागर

क्या आप जानते हैं मृत सागर  के बारे में?

  1. दुनिया का एकमात्र ऐसा सागर है के जिसके पानी में जाके कोई भी इंसान डूबता नहीं है इसका विज्ञानिक कारण है कि पानी का घनत्व 1.2kg/ लीटर है इसके के पानी में दुनिया के बाकी सागर के मुकाबले 8 गुना ज्यादा नमक है इसलिए इसके पानी के अंदर कोई भी मछली अथवा वनस्पति नहीं है!
  2. मृत सागर समुद्र तल से 440मीटर नीचे, दुनिया का सबसे निचला बिंदु कहा जाने वाला सागर है। इसे खारे पानी की सब से निचली झील भी कहा जाता है। ६५ किलोमीटर लंबा और १८ किलोमीटर चौड़ा यह सागर अपने उच्च घनत्व के लिए जाना जाता है, जिससे तैराकों का डूबना असंभव होता है।मृत सागर में मुख्यत: जॉर्डन नदी और अन्य छोटी नदियाँ आकर गिरती हैं। इसमें जीवाणुओं की ११ प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त मृत सागर में प्रचुर मात्रा में खनिज पाए जाते हैं। ये खनिज पदार्थ वातावरण के साथ मिल कर स्वास्थ्य के लिए लाभदायक वातावरण बनाते हैं। मृत सागर अपनी विलक्षणताओं के लिए कम से कम चौथी सदी से जाना जाता रहा है, जब विशेष नावों द्वारा इसकी सतह से शिलाजीत निकालकर मिस्रवासियों को बेचा जाता था। यह चीजों को सड़ने से बचाने, सुगंधित करने के अलावा अन्य दूसरे कार्यों के उपयोग में आता था।
  3. इसके अतिरिक्त मृत सागर के अंदर की गीली मिट्टी को क्लेयोपेट्रा की खूबसूरती के राज से भी जोड़ा जाता है। यहाँ तक कि अरस्तू ने भी इस सागर के भौतिक गुणों का जिक्र किया है। हाल के समय में इस जगह को हेल्थ रिज़ॉर्ट के तौर पर विकसित किया गया है।
  4. आम पानी की तुलना में मृत सागर के पानी में २० गुना ज्यादा ब्रोमीन, ५० गुना ज्यादा मैग्नीशियम और १० गुना ज्यादा आयोडीन होता है। ब्रोमीन धमनियों को शांत करता है, मैगनीशियम त्वचा की एलर्जी से लड़ता है और श्वासनली को साफ करता है, जबकि आयोडीन कई ग्रंथियों की क्रियाशीलता को बढ़ाता है। सौंदर्य और स्वास्थ्य के लिए मृत सागर के गुणों की सिद्धि की वजह से ही कई कंपनियां मृत सागर से ली गईं चीजों पर आधारित सौंदर्य प्रसाधन बनाती हैं। इसके गर्म सल्फर सोते और कीचड़ कई बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर आर्थराइटिस और जोड़ों से संबंधित बीमारियों के इलाज में। लेकिन पिछले कुछ सालों से मृत सागर तेज़ गति से सिमट रहा है। पिछले ४० सालों में इसके पानी का तल २५ मीटर कम हो गया है। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि २०५० तक शायद यह पूरी तरह गायब हो जाएगा।
  5. रासायनिक तत्व /- मृत सागर के जल में ब्रोमिन, मैग्नीशियम तथा आयोडिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। ब्रोमीन धमनियों को शांत करता है, मैग्नीशियम त्वचा की एलर्जी से लड़ता है और श्वासनली को साफ़ करता है। जबकि आयोडिन कई ग्रंथियों की क्रियाशीलता को बढ़ाता है। सौन्दर्य और स्वास्थ्य के लिए मृत सागर के गुणों की सिद्धि की वजह से ही कई प्रसिद्ध कंपनियाँ मृत सागर से ली गईं चीज़ों पर आधारित सौन्दर्य प्रसाधन की सामग्री बनाती हैं। इसके गर्म सल्फ़ गैस और कीचड़ कई बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाते है, ख़ासकर आर्थराइटिस और जोड़ों से संबंधित बीमारियों के इलाज में इनक योगदान अधिक है।मृत सागर का जल चीज़ों को सड़ने से बचाने, सुगंधित करने के अलावा अन्य दूसरे काम के उपयोग में भी आता था। इसके अलावा मृत सागर के अंदर की गीली मिट्टी को 'क्लेयोपेट्रा' की ख़ूबसूरती के राज से भी जोड़ा जाता है। अरस्तु ने भी इस सागर के जल का महत्त्व समझाया है। हाल के समय में इस जगह को हेल्थ रिज़ॉर्ट के तौर पर विकसित किया गया है
  6. इसके पास अनेक पिकनिक स्पॉट और होटल बनाए गए हैं। हर समय यहाँ लोगों की भीड़ लगी रहती है। छुट्टियाँ और मौज-मस्ती के अन्य मौकों पर लोग सागर में तैराकी का लुत्फ उठाते हैं। किनारों पर आकर लोग इसका काला कीचड़ अपने शरीर व चेहरे पर लगाते हैं। माना जाता है कि यह कीचड़ न सिर्फ़ त्वचा को निखारता है, बल्कि इसमें कई बीमारियों को समाप्त करने का भी गुण है।

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